Saturday, December 19, 2009

एक कहानी

हर दरवाज़ा एक नयी कहानी सुनाता है,
कभी राज़ छुपता है,कभी खुशियाँ सजाता है,
ग़म के साये में कभी,
कभी तनहाइयों में,
छुपके से एक अजनबी सहारा बन जाता है ,
हर दरवाज़ा एक नयी कहानी सुनाता है|

बेचैनियों में जो हों कभी, तो बेचैनिया और बढ़ाता है,
फुरसत के लम्हों में अक्सर ,इंतज़ार का ज़रिया बन जाता है,
कभी राह दिखता है,कभी सपने सजाता है,
कभी रिश्ते बनाता है ,कभी मंजिल से मिलाता है.
हर दरवाज़े के साये में एक दूसरा दरवाज़ा नज़र आता है,
तलाश ख़त्म कभी होती नहीं ,बस वक़्त ख़त्म हो जाता है........

Sunday, December 13, 2009

एक अजनबी, एक हसीना

माशा अल्लाह !! उस अजनबी की किस्मत,
बिन मुलाकात इनती मोहब्बत |

दुआ करते हैं हम के अब टूटे ये इंतज़ार,
ऐ अजनबी न कर उन्हें अब और बेकरार,

ऐ अजनबी अब रुख से ज़रा नकाब उठा,
जहां उनकी भी अब तू रौशन कर जा,

ऐ अजनबी तेरा इंतज़ार उन्हें भी रहेगा,
ऐ अजनबी तेरा इंतज़ार हमें भी रहेगा...
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