आज
फिर ख्वाबों के अंजुमन में खो गए,
आसूँ हमारे आज फिर छुपकर,
पल्कों पर ही सो गए....
आज फिर जश्न का आलम है,
आज फिर शाम रंगीन है,
भरी महफिल में होकर भी,
हम आज फिर तन्हा हो गए.....
गुमशुदा यादों की तलाश में आज
फिर ख्वाबों के अंजुमन में खो गए,
आसूँ हमारे आज फिर, छुपकर
पल्कों पर ही सो गए....


