मोहब्बतें गुस्ताखी
मोहब्बतें गुस्ताखी
मोहब्बतें गुस्ताखी माफ़ कीजिये हुज़ूर,
दिल का नज़राना कुबूल कीजिये हुज़ूर,
बेखुदी मे हम आपको यूँ पुकारे चले जा रहे,
यादों में आपके शाम-ओ-सेहर गुजारे चले जा रहे,
अदाओ में आपके हम कुछ यू फना हो चुके हैं,
मुस्कुरहट में आपके हम कुछ यू खो चुके हैं,
गुजारिश हैं बस इतनी के...
एक आखरी एहसान हमपर कीजिये हुज़ूर,
दीवाने दिल को हमारे दिल में अपने एक बार पनाह दीजिये हुज़ूर ....
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