Tuesday, September 22, 2009

तलाश

तलाश



अन्धेरियों में थक कर तरस कर नैंना उनकी
करती हैं रौशनी की तलाश,
यु तो लबो पर सजती हैं झूठी मुस्कुराहट उनके,
पर दिल में पन्पती हैं गुमशुदा
मोहब्बत की प्यास,
चीखती खामोशियों में बस्ती हैं वो यु,
के महसूस हैं उन्हें अकेली तन्हाई का एहसास,
अन्धेरियों में थक कर तरस कर नैना उनकी
करती हैं बस रोशनी की तलाश,
यु तो लबो पर सजती हैं झूटी मुस्कुराहट उनके
पर दिल में पनपती हैं गुमशुदा
मोहब्बत की प्यास.....

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