
महेक
बेगानी एक महेक आजकल दूर करती हैं दो
अजनबी दिलूँ के दरमियाँ,
या महेक उठते हैं हम ख़ुद करीब
उन्हें लाने के लिए,
सवारने लगे हैं हम आजकल एक
अजनबी की खातिर,
तरसते हैं हमारे नैना, नैन उनसे मिलाने के लिए,
तरसती हैं हमारी सासें करीब उन्हें पाने के लिए,
अजनबी दिलूँ के दरमियाँ,
या महेक उठते हैं हम ख़ुद करीब
उन्हें लाने के लिए,
सवारने लगे हैं हम आजकल एक
अजनबी की खातिर,
तरसते हैं हमारे नैना, नैन उनसे मिलाने के लिए,
तरसती हैं हमारी सासें करीब उन्हें पाने के लिए,
बेगानी एक महेक आजकल दूर करती हैं दो
अजनबी दिलूँ के दरमियान,
या महक उठते हैं हम ख़ुद करीब
उन्हें लाने के लिए,
या महक उठते हैं हम ख़ुद करीब
उन्हें लाने के लिए,
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