Sunday, September 27, 2009

आज

गुमशुदा यादों की तलाश में आज
फिर ख्वाबों के अंजुमन में खो गए,
आसूँ हमारे आज फिर छुपकर,
पल्कों पर ही सो गए....

आज फिर जश्न का आलम है,
आज फिर शाम रंगीन है,
भरी महफिल में होकर भी,
हम आज फिर तन्हा हो गए.....

गुमशुदा यादों की तलाश में आज
फिर ख्वाबों के अंजुमन में खो गए,
आसूँ हमारे आज फिर, छुपकर
पल्कों पर ही सो गए....

Tuesday, September 22, 2009

इश्क


मखमली साँसों की आहट से आहे भरने लगें,
इश्क का खुमा कुछ यु छाया के हम ख़ुद से
बिछड़नें लगें,

हर हिजाब यु उट गया,
शर्म--हया की सरहदें यु घुल गई,
आगोश में उनके जो क़ैद हुए तो जन्नत के
दाएरे हम भूल गए,
उस बंदिश में साँस लिया तो
फ़ासलों में जीना भूल गए,

मखमली साँसों की आहट से आहे भरने लगें,
इश्क का खुमा कुछ यु छाया के हम ख़ुद से
बिछड़नें लगें.....