Friday, November 6, 2009

दुरी

चांदनी जो कैद हुई बादलों की गिरफ्त में,
तो एक सितारा रो पड़ा आज रुखसत के बाद |

अन्धेरियों से हुई यु मुलाक़ात,
दिये बुझ गए शम्मा जलता रहा आज रुखसत के बाद |

गर्द बने आसुओं की कहार न सुना कोई,
सुनकर फिजाए रो पड़ी आज रुखसत के बाद |

एक शीश महेल में, एक सूनी महफिल में,
पुकारते रहे उनका नाम,
वो न सुने, न सुना कोई,
सुनकर एक शीशा रो पड़ा, आज रुखसत के बाद ||

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